शुक्रवार, 4 फ़रवरी 2011

VAASTU

वास्तु शास्त्र कोरी बातें नहीं, बल्कि वैदिक गणित के अचूक सिद्घांतों पर काम करता है। वैज्ञानिक भी इसके नियमों से सहमति जता चुके हैं। दसों दिशाओं के निश्चित क्रम और स्थान के अनुसार किसी भी प्लॉट को विभाजित करके वास्तुकारों द्वारा तय किया जाता है कि किस दिशा में कौन सा स्थान होना चाहिए।

सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है : लंदन स्थित किंगस्टन यूनिवर्सिटी के मनोविज्ञानी प्रो. जॉर्डन ग्रे कहते हैं कि वास्तु नियमों के आधार पर बने भवनों में रहने से उसके चारों ओर एक प्रकार का सकारात्मक ऊर्जा का आवरण तैयार हो जाता है, जो उसमें रहने वालों की मनोदशा को सकारात्मक बनाता है।
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