गुरुवार, 14 अक्टूबर 2010

हरी का सिमरन


सिमरन ही सिमरन

ईश्वर के {किसी भी } नाम का जप करो
जैसे पानी की बूँद को बाष्प बनाने से उसमें 1300 गुनी ताकत आ जाती है वैसे ही मंत्र को जितना से दिल जपा जाता है, उसका प्रभाव उतना ही ज्यादा होता है |
दिल से जप करने से मन की चंचलता कम जाती है व एकाग्रता बढ़ती है |
एकाग्रता सभी सफलताओं की जननी है |
मंत्रजाप निष्काम भाव से प्रीतिपूर्वक
निष्काम भाव से प्रेमपूर्वक विधिसहित करना चाहिए
ईश्वर के नाम का बार-बार जप करो |
हर समय का नाम रटने की आदत डालें |
मन रहेगा तो संकल्प-विकल्प करके उपद्रव पैदा करेगा |
इसलिए पूरा दिन व रात्रि को बार-बार जाप करें |
मन या तो हरि-स्मरण करता है या फिर विषयों का चिंतन करेगा
इसलिए जप का ऐसा अभ्यास डाल लें कि मन अकागर होकर नींद में या जाग्रत में किसी भी दशा में हो कि तुरंत जप करने लगे |
इससे मन का इधर-उधर भागना कम होगा |
मन को परमात्मा के सिवाय फिर अन्य विषयों में चैन नहीं मिलेगा

वास्तु आचार्य
० ९०१३२०३०४०

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