सोमवार, 8 नवंबर 2010

वास्तु

किसी ईमारत के पीछे की ओर ऊँचाई हो, मध्य में भवन हो तथा आगे की ओर नीचा होकर वहाँ जल हो, उस भवन के रहवासी सुख ओर प्रसिद्धि प्राप्त करतें है और भवन सदियों तक बना रहता है।

वास्तु आचार्य
अवतार सिंह
०-१३२०३०४०

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें