मंगलवार, 14 जून 2011

CHANDAR GRAHAN 15 JUNE 2011

कैसा रहेगा चंद्रग्रहण का देश पर असर  
- डॉ. रामकृष्ण डी. तिवारी

15 जून को होने वाले चंद्रग्रहण की घटना दो नक्षत्रों ज्येष्ठा व मूल के मध्य घटित हो रही है। ये भिन्न नक्षत्र भिन्न-भिन्न राशियों से संबंधित हैं। सामान्यतः यह दुर्लभ योग है। इस एक से अधिक राशि में ग्रहण के फलस्वरूप अधिकांशजन पर इस ग्रहण का प्रभाव प्रतिकूल रहेगा।

व्यापारी, चिकित्सा कर्म, वाहन संबंधित कर्म करने वालों को इस ग्रहण में दानादि अवश्य करना चाहिए, क्योंकि उन पर इसका प्रभाव अधिक कष्टकारी है। पंजाब, बंगाल, असम, बिहार क्षेत्र में चंद्रग्रहण के कारण अशांति, कष्ट, परेशानियां अधिक आएंगी। योगाचार्य, वैद्य, मादक पदार्थों का सेवन व व्यापारी, राजदूत, शासकीय पद पर कार्यरत महिलाएं, मंत्री, नेता व शिक्षकों के लिए यह बाधाएँ उत्पन्न करने की स्थिति का योग बनता है।

इन ग्रहयोग में इस ग्रहण के आने से फल विक्रेता, स्वर्ण विक्रेता, जवाहरात व्यवसायी, लाल रंग के पदार्थों का व्यापार करने वाले, तांबा, गुड़, शकर में विशेष लाभ की संभावनाएं बनेंगी। ग्रहण काल में अपनी शक्ति व योग्यता के अनुसार सभी को दान, जप पाठ, साधना करना जरूरी है।

जब दो राशियों में ग्रहण का योग बने तो अनुसंधानकर्ता व वैज्ञानिकों के अतिरिक्त किसी को भी इसका दर्शन नहीं करना चाहिए। इसमें की गई उपासना से जहां सिद्धि मिलती है, वहीं पर इसके दोषों के प्रभाव में कमी आती है। सूतक काल के पश्चात बालक, वृद्ध, रोगी व गर्भिणी स्त्रियों को छोड़कर सभी को अन्न का त्याग करना चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर फल ग्रहण का विधान है।

ग्रहण काल में सोना, काम कर्म करना, भोजन करना, मल-मूत्र त्यागना, मालिश करवाना वर्जित रहता है। इस काल के पूर्व तैयार खाद्य पदार्थ का सेवन भी उचित नहीं है। यह ग्रहण कुंभ राशि के जातक को छोड़कर सभी के लिए कष्टकारी है।

ग्रहण काल

सूतक- दिनांक 15-6-11 को दिन में 2 बजकर 53 मि. पर प्रारंभ।
ग्रहण स्पर्श- रात्रि 11 बजकर 53 मि.
ग्रहण मध्य- दि. 16 के प्रारंभ में रात्रि 1 बजकर 43 मि.
ग्रहण मोक्ष- रात्रि 3 बजकर 33 मि. पर होगा।
पर्व काल- 3 घंटे 40 मि. है।

यह समय संपूर्ण भारत में इसी प्रकार रहेगा।

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